जांजगीर चांपा : काली मिर्च से तो लगभग सभी लोग परिचित होंगे. अक्सर यह हमारे किचन में मसाले के रूप में यूज किया जाता है. इसके मरीच भी कहते है. इस काली मिर्च के आयुर्वेद में बहुत सारे औषधीय फायदे है. जैसे की काली मिर्च का सेवन करने से कफ की समस्या को कम करता है, दिखने में छोटी लेकिन फायदों में बड़ी इस काली मिर्च के अनगिनत लाभ है. खांसी में काफी आराम मिलता है, प्रतिदिन सुबह खाली पेट काली मिर्च के सेवन से शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को भी बढ़ता है. आइए जानते हैं आयुष चिकित्सक से कि काली मिर्च के क्या औषधीय फायदे हैं.
जांजगीर चांपा जिला हॉस्पिटल के आयुर्वेद चिकित्सक अधिकारी डॉ. फणींद्र भूषण दीवान ने बताया कि काली मिर्च या मरीच का आर्युवेद में बहुत ही महत्व है. आयुर्वेद के अनुसार काली मिर्च का प्रयोग सर्दी जुकाम, खांसी, दमा या पाचन शक्ति में कमी हो जाने पर किया जाता है, इसके साथ ही लीवर के फंक्शन में तेजी लाता है जिससे भूख लगने लगती है और खाना खाने के बाद डाईजेशन भी अच्छे से होता है. गले में खरास खांसी में सिर्फ काली मिर्च का प्रयोग कर सकते है या भी काली मिर्च, सोंठ और पीपली तीनो को मिलाकर कर सकते हैं.
डॉक्टर दीवान ने और बताया की आर्युवेद में कली मिर्च का प्रयोग बहुत सारे चीजों में होता है जिसे औषधीय के रूप में मिलाकर किया जाता है. जिसके विशेष रूप से उदर रोगों में किया जाता है. इसके साथ ही और बताया की प्रसूति के बाद भी काली मिर्च का प्रयोग किया जाता है जिससे युटेरस को मजबूत करने में मदद मिलती है. इसी कारण प्रसूति महिलाओं के लिए सेवन करने के लिए जो औषधीय बनाई जाती है उसमें काली मिर्च को मुख्य रूप से डाला जाता है.
काली मिर्च का अधिक प्रयोग करने से हो सकता है नुकसान
डॉक्टर दीवान ने बताया कि काली मिर्च का अधिक मात्रा में प्रयोग करने से पित्त को वृद्धि होती है और पेट में जलन होता है, इसलिए इसका प्रयोग सावधानी से और मात्रानुसार और चिकित्सक के सलाह लेकर करना चाहिए. अगर सिर्फ काली मिर्च का प्रयोग कर रहे है तो आधा ग्राम से एक ग्राम उपयोग करना चाहिए. और यदि त्रिकटु (काली मिर्च, सोंठ, पीपली) मिलाकर साथ में 1 से 2 ग्राम तक प्रयोग कर सकते हैं
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2024, 22:57 IST