भारत सरकार ने GST काउंसिल की हालिया बैठक में टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े सुधार किए हैं। अब तक GST में कई स्लैब थे, जिससे आम लोगों और कारोबारियों दोनों को उलझन होती थी। लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था सरल होकर आम जनता के लिए अधिक उपयोगी बनने जा रही है। आइए जानते हैं क्या बदलाव हुए हैं, नई दरें क्या होंगी और ये कब से लागू होंगी।
1. GST की नई संरचना
अब GST को सरल बनाकर केवल दो मुख्य स्लैब रखे गए हैं:
- 5% GST स्लैब: रोजमर्रा की जरूरत की चीज़ों और आम उपयोग की वस्तुओं पर
- 18% GST स्लैब: सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर
इसके अलावा, सरकार ने 40% का एक विशेष स्लैब भी तय किया है जो सिर्फ लक्ज़री और सीन (Sin) प्रोडक्ट्स पर लागू होगा, जैसे तंबाकू, पान मसाला, शराब, महँगी गाड़ियाँ, यॉट्स इत्यादि।
2. शून्य GST (0% टैक्स)
कई आवश्यक और जनहित वाली वस्तुओं व सेवाओं को पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया गया है, जैसे:
- जीवन रक्षक दवाएँ और कैंसर/दुर्लभ बीमारियों की मेडिसिन
- जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी
- कुछ शिक्षा से जुड़ी वस्तुएँ जैसे किताबें, पेंसिल, कॉपी आदि
3. कब से लागू होगा?
यह नया GST ढांचा 22 सितंबर 2025 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इस सुधार से कर प्रणाली न सिर्फ आसान होगी बल्कि उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को राहत मिलेगी।
4. उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
- आम उपयोग की चीजें जैसे तेल, साबुन, टूथपेस्ट, घी, पैक्ड फूड, कृषि उपकरण आदि पर टैक्स घटकर 5% रह जाएगा।
- बीमा पॉलिसियों और जरूरी दवाओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटोमोबाइल और कंस्ट्रक्शन सामग्री जैसे सामान अब 18% स्लैब में होंगे।
- लक्ज़री और नशे से जुड़ी वस्तुओं पर टैक्स बढ़कर 40% रहेगा, जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने की कोशिश होगी।
5. व्यापारियों और MSME के लिए राहत
- पंजीकरण और टैक्स रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी।
- MSME को विशेष सुविधाएँ दी जाएँगी, ताकि छोटे व्यवसाय बिना अधिक बोझ के आसानी से काम कर सकें।
- जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल भी जल्द शुरू होगा जिससे टैक्स विवाद जल्दी सुलझ सकें।
निष्कर्ष
GST 2.0 भारत की कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे आम जनता को रोजमर्रा की वस्तुएँ सस्ती मिलेंगी, व्यापारियों को आसानी होगी और सरकार को राजस्व स्थिरता भी मिलेगी।
